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अकोलकर गुरूजी

श्री ञिंबकेश्वर यह प्रमुख बारह ज्योतिर्लिंगमेसे एक आदयपीठ है कर्इ ऋषीमुनीओंने बडी तपश्चर्या कर पावन कि गर्इ तपोभूमी ञिंबकेश्वर है प्राचीन धर्म सांस्कॄतिक अदभूत अविष्कार वाला तीर्थक्षेत्र महाराष्ट्र में है ञिंबकनगरिका खास वैशिष्ठ्य है यहाँपर हर एक बातपर संत देव देवताओंकी चैतन्यकी निशानी है उसी तरह निसर्ग की असीम कॄपा से सौंदर्य को झालर लगी है।


सहयाद्री यह भारत का प्रमुख परबत है महाराष्ट्र के प्राकॄतिक रचनाओंके आधारपर चार भाग माने जाते है जैसे कोकणका भाग सहयाद्री की रीढ, पूरब का दख्खन का पठार और उत्तरी दिशा में सातपुडा परबत तापी पूर्णा के खोरे है सहयाद्री की शुरूवात ब्रहमगिरी से होती है ब्रहमगिरी को साक्षात शिव का लिंग माना गया है पुराने कालके स्थल में ब्रहमगिरी परबत का वर्णन पंचमुखी शिव के स्वरूप मे किया गया है उस पंचमुख के नाम सदयोजात वामदेव अघोर तत्पुरूष और र्इशान है यह पाचलिंग के नुसार गोदावरी वैतरणा अहिल्या बानगंगा और रामगंगा आदि का उगम हुआ है इस शिवरूपी ब्रहमगिरी का उत्तरी भाग गंगाद्वार गंगा गोदावरी के नामसे जाना जाता है ब्रहमगिरी परबत के औंदुंबर पेड के मुखद्वार पर गंगा प्रकट हुर्इ है ब्रहमगिरी परबत का दाहिनेवाला भाग पर निलपर्वत नाम का छोटा टिला है वहाँ माता निलांबीका मंदिर की स्थापना कि गर्इ है और उसी को ब्रहमगिरी का वामजानु माना जाता है।


शिवरूपी ब्रहमगिरी के पावन परिसर में संत ज्ञानेश्वर महाराज के बडे भार्इ अथवा गुरू संत निवॄत्तिनाथ का समाधीस्थल है संत निवॄत्तिनाथजीका इस परबत में अखंड वास्तव था पुरानकालमे इंद्र भगवान और महर्षी नारदजी का ञिंबकनगरीमें वास्तव था ऐसे दाखिले ग्रंथोमे मिलते है भगवान परशुरामने इसी पविञ भूमी में तपश्चर्या की थी उसी तरह कुंभमेले मे प्रभुरामचंद्र और विदर्भ के संत गजानन महाराज आये थे यह पुराने ग्रंथोमें पाया गया है श्री दत्तभगवान को ञिंबकनगरीमें सिद्धी प्राप्त हुर्इ थी ञिंबकनगरीके कुछ अंतर पर श्री स्वामी सम्रतह गुरूकुल पीठ की स्थापना श्री अण्णासाहेब मोरे गुरूमाउली सन 1994 में कि है इस नगरीमें सिद्ध पुरूषोंका हमेशा वास्तव्य रहा है इतिहास के कर्इ ग्रंथोमें और महाभारत में पढा गया है की ञिंबकनगरी ऋषी और सिद्धी पुरूषोंकी पुण्यभूमी है।


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About Us

अकोलकर गुरूजी का कर्इ सालोसे पविञ स्थान ञ्यंबकेश्वर मे वास्तव्य है पूजा करनेकी परम्परा उनके पूरवजोसे चली आ रही है श्री मामासाहेब अकोलकर गुरूजीका पूजाविधीका योगदान 45 साल का है श्री लोकेश अकोलकर गुरूजीने अपना वेदअध्ययन श्री क्षेञ काशीमे किया है श्री धनंजय अकोलकर गुरूजी भाविकोको ज्योतिषशास्त्र का मार्गदर्शन करते है श्री विनय अकोलकर गुरूजीको वेदअध्ययन मे शास्त्री की पदवी दियी गयी हैअकोलकर गुरूजी शास्त्रोक्त पद्धतीचे नारायण नागबली ञिपिंडी श्राद्ध कालसर्प योग शांति की पूजा करते है।

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Akolkar Guruji,
157 "Vedvastu" Main Road,
Laxmi Narayan chowk,
Traimbkeshwar - 422212.

02594 233154 /233164
mamaakolkar@gmail.com

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